व्यंग्य
महंगाई
पर मजबूत पकड़
हमने
अपने किराना वाले से कहा-क्यों भई रामरतनजी, आप खाने-पीने की
चीजों के दाम क्यों नहीं घटा रहे जबकि सरकार बराबर यह दावा कर रही है कि महंगाई
दिनों दिन कम हो रही है।अच्छे दिन आ गए हैं, परंतु हमें तो
ऐसा कहीं से भी नहीं लग रहा। वह बोला- आप भी साहब यह कैसी बातें कर रहे हो। महंगाई
कहां कम हुई, आप इनके बयानों पर मत जाओ।हमने तर्क दिया कि
पेट्रोल और डीजल के दाम तो काफी घट गए हैं इन छ्ह महीनों में, हमने अखबार में पढ़ा है कि कच्चे तेल की कीमतों में 37 प्रतिशत और पेट्रोल
डीजल के दाम 8 से 11 प्रतिशत घटे हैं।इनकी वजह से ही आम जरूरतों के दाम घटते-बढ़ते
हैं। वह अड़ गया कि आप कुछ समझते नहीं कि दाम घटे तो सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाकर
सब बराबर कर दिया तो महंगाई वहीं की वहीं रही ना।
रामरतनजी
ने आगे खोलकर बताया- देखिये साहब, अगर आप हमारा दिमाग और नहीं
चाटने की गारंटी दें तो मैं कुछ कहूं। हमने कहा- चलिये आप बताओ, हम कुछ नहीं बोलेंगे। इस शर्त पर किराने वाले ने बताया-सरकार ने देखा कि
तेल के दाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन छ्ह महीनों में 105 डालर से घटकर 65 डालर प्रति
बेरल पर आ गए तो जनता को दिखाने के लिए घटी कीमतों के मुक़ाबले रुपये में चार आने
घटा दिये। तेल कंपनियों का फायदा तो यूं का यूं रहा। जनता को मिला बाबाजी का
ठुल्लू।
हमने
जानना चाहा, हमें तो यह बताओ भाई कि महंगाई कब घटेगी? रामरतन उकता गया। साहब, भारत महान देश है। यहां
महंगाई एक बार बढ़ गई तो बढ़ गई । व्यापारी उसे मजबूती से पकड़कर रखते हैं, ताकि पीछे की ओर नहीं लौटे। जैसे-जैसे देश के कदम आगे बढ़ते जाते हैं वैसे
ही महंगाई भी बढ़ती है और पीछे नहीं आ सकती।हम रण छोड़ थोड़े ही हैं।इसलिए बाबूजी, यह भूल जाओ कि एकबार दाम बढ़ गए तो कभी कम होंगे। दाम नहीं बढ़ रहे इसी का
शुक्र मनाओ। और अच्छे दिन किसे कहते हैं।हमारे लिए तो अच्छे दिन ही हैं। आप तो दो
काम करो, अपनी कमाई बढ़ाओ और शॉपिंग बढ़ाओ, अच्छे दिन अपने आप आ जाएंगे। महंगाई को लेकर अगर यूं ही हमसे उलझते रहे
तो आपको कभी अच्छे दिन नसीब नहीं होंगे, हमारी बात समझे कि
नहीं ? हमने उसके आगे हारकर ‘हां’ में अपनी मुंडी हिलाई और मंडी की राह पकड़ी।
-फारूक आफरीदी
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