मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

मालाएं नहीं माल लाओ भाईजी !



व्यंग्य 

मालाएं नहीं माल लाओ भाईजी !

       नेताजी चुनाव जीत गए तो कच्ची बस्ती के नागरिकों ने फूलमालाएँ पहनाकर उनका अभिनंदन करने की ठानी। कच्ची बस्ती अब अपने उद्धार के लिए लालायित थी । भाईजी के नाम से मशहूर मोहल्ले में उनके मर्जीदान कार्यकर्ता को साथ लेकर सब लोग नेताजी के घर की ओर चल पड़े। नेताजी अपने घर में किन्हीं के साथ नाश्ता कर रहे थे। अंदर कहलवाया गया तो अंदर से हुकम आया कि तनिक इंतजार करो, जरूरी मीटिंग चल रही है। काफी देर के बाद भी जब वे नहीं आए तो भाईजी ने आइडिया दिया कि सब बुलंद आवाज में नारे लगाओ। सब जानते हैं कि नारे नेताओं की खुराक होती है। नारों की आवाज सुन नेताजी अपने नाश्ते की गरमागरम खुराक छोडकर बाहर आए। भीड़ का नेतृत्व उनका खास कार्यकर्ता ही कर रहा था। नेताजी ने फटाफट मालाएँ पहनी और राम-राम कहते हुए फिर से घर में घुस गए। यह भी बोले कि भाईजी को अंदर भेज दो। भाईजी ने आश्वस्त किया कि वे सबकी बात नेताजी को ठोक–बजाकर कह देंगे। भीड़ बिखर गयी तो भाईजी भीतर चले गए।वे देखते क्या हैं कि कुछ देर पहले तक जो मालाएँ नेताजी के गले की शोभा बढ़ा रही थी, अब कूड़ेदान में पड़ी थी और बड़े बड़े पुष्पगुच्छ टेबल पर महक रहे थे।
       नेताजी ने नाश्ता कर रहे महानुभावों से भाईजी का परिचय कराते हुए बताया कि ये सब गरीबों के हितैषी और शहर के माने हुए बिल्डर हैं। हमने इनके करोड़ों रुपयों के लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट पूरे करवाने का वादा कर रखा है । इन्होंने ही अपने चुनाव का सारा खर्चा उठाया है। भाईजी, हमने पब्लिक से एक रुपये तक का चंदा नहीं लिया। सभी कार्यकर्ताओं को  चाय, नाश्ता, खाना-पीना, ट्रांसपोर्ट और उसकी रोज की मज़दूरी सब कुछ दिल खोलकर दिया। कार्यकर्ता लोगों को घरों से निकालकर बूथों तक ले गए। पार्टी की साख और  इन मित्रों की मेहरबानी से ही जीता हूं। अब मालाएँ,स्वागत,अभिनंदन में हमारा वक्त बर्बाद मत करो और माल लाओ। ये कच्ची बस्ती का राग छोड़ो, वो तो जैसी पहले थी, आगे भी वैसे ही रहेगी। तुम समझने की कोशिश करो कि अगर हमने इन्हें सुविधाएं दिला दी तो ये और करो-और करो की रट लगाकर हमें बेकार के कामों में उलझाकर मार देंगे । हमारे स्वयं के विकास के सारे काम चौपट हो जाएंगे।हां, तुम्हारे पाँच साल तक के भरपूर खर्चे-पानी की गारंटी अपनी है। तुम तो बस कच्ची बस्ती को भरोसे कि भेंस की तरह संभालकर रखो। बाकी सब हम देख लेंगे। 
- फारूक आफरीदी               

संपर्क: बी-70,प्रगति पथ, बजाज नगर,जयपुर-15 email- faindia2015@gmail.com मो.94143 35772   

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